आर्थिक सबलता आज एक जादुई ताकत बन गई है। यह जीवन को उसके सभी सिद्धांतों से परे ले जाती है। वे सिद्धांत जिनको जीवन अपने ही मन के भावों मे बेपरवाह भिगोना चाहता है और उनमें अपने मन जैसे ही किसी साथी को भागीदार बनाना चाहता है।
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