Sunday, December 27, 2020

संपादकीय: हिंसा की जड़ें

भारतीय समाज सदा से महिलाओं और बच्चों को अनुशासित रखने के नाम पर उन्हें प्रताड़ित करने का पक्षधर रहा है। मगर मानवीय मूल्य इसकी इजाजत नहीं देते। जैसे-जैसे समाज में जागरूकता आई है, किसी भी प्रकार की हिंसा के खिलाफ स्वर ऊंचे होते गए हैं। खासकर महिलाओं के प्रति संकीर्ण सोच को खत्म करने के लिए कठोर कानून भी बनाए गए।

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