Tuesday, December 29, 2020

संपादकीय: बहस के बजाय

जनप्रतिनिधियों की बैठक के लिए नगर निगम से लेकर विधानसभा या फिर संसद तक जितने भी सदन हैं, उनसे उम्मीद की जाती है कि वहां आपसी विचार-विमर्श और बहस के बाद जनता के हित में फैसले लिए जाएंगे, नीतियां और योजनाएं बनाई जाएंगी।

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