अर्थ व्यवस्था के सम्बंध में तमाम रेटिंग एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों को इस बात की उम्मीद नहीं थी कि हालात तेजी से सुधरने लगेंगे, इसीलिए रेटिंग एजेंसियों के अनुमान हालात की गंभीरता को कहीं ज्यादा आंक रहे थे और दूसरी तिमाही में गिरावट की दर दस फीसद से ऊपर रहने की बात कर रहे थे। लेकिन दूसरी तिमाही के आंकड़ों ने इन्हें गलत साबित करते हुए अर्थव्यवस्था में जोश पैदा किया है।
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