नदियों के जल प्रवाह और उनके जीवन की रक्षा के लिए समाज से लेकर सरकारों के स्तर पर जो उपेक्षा होती आई है, उसी का परिणाम है कि आज नदियों का जीवन समाप्त हो रहा है। देश की लगभग साढ़े चार हजार नदियां गायब हो चुकी हैं और उनकी अनुगामी बन कर अन्य नदियां अपना अस्तित्व समाप्त होने की बाट जोह रही हैं।
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