Saturday, August 29, 2020

शख्सियत: जनप्रिय गीतों का राजकुमार शैलेंद्र

शैलेंद्र ने गीतों के माध्यम से समतामूलक भारतीय समाज के निर्माण के सपने और अपनी मानवतावादी विचारधारा को अभिव्यक्त किया। ‘आवारा हूं या गर्दिश में’, ‘मेरा जूता है जापानी’ और ‘सब कुछ सीखा हमने’ जैसे कालजयी फिल्मी गीत रचने वाले इस गीतकार ने दबे-कुचले लोगों की आवाज को बुलंद करने के लिए भी कालजयी नारा दिया- ‘हर जोर-जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है।’

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