जब अंग्रेजी विद्वानों ने राम का नाम सुना और रामचरितमानस को सुना तब हैरानी हुई कि आखिर एक पुस्तक और वह भी अवधी की, वह प्राणवायु की भांति पूरे भारतीय जनमानस को किस तरह प्रभावित करती रहती है। कई विद्वानों ने रामचरितमानस को अंग्रेजी में अनूदित भी किया।
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