Tuesday, March 31, 2020

जनसत्ता विशेष: विषाणु से पार पाना है तो जीवन शैली बदलनी होगी

कोरोना संक्रमण दरअसल कथित आधुनिक सभ्यता में झटपट विकास और तुरंत मुनाफे के लालच में अपनाई जा रही दोषपूर्ण जीवन शैली का रोग है। यह रोग प्रकृति के खिलाफ महज तात्कालिक सुविधा और बढ़ती मांसाहार की प्रकृति का भी प्रतीक है। यह एक चेतावनी भी है कि पशुओं और पक्षियों को महज खाद्य समझने का परिणाम यह भी हो सकता है जिसमें आदमी क्या सभ्यताएं नष्ट हो सकती हैं।

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